इस्तेमाल कैसे करें
- ऑफ़र लेटर से अपना सालाना CTC डालें।
- बेसिक सैलरी CTC के % में डालें — नए लेबर कोड में यह आमतौर पर कम से कम 50% होती है।
- चुनें कि आपकी कंपनी PF कैसे गिनती है, और क्या ग्रेच्युटी CTC का हिस्सा है।
- अपने राज्य का प्रोफ़ेशनल टैक्स डालें (कई राज्यों में ₹200 महीना; जहाँ नहीं लगता वहाँ 0)।
फ़ॉर्मूला
ग्रॉस सैलरी = CTC − कंपनी का PF − ग्रेच्युटी (अगर शामिल हो)।
इन-हैंड = ग्रॉस − आपका PF − प्रोफ़ेशनल टैक्स − इनकम टैक्स।
PF आपकी और कंपनी दोनों की तरफ़ से बेसिक का 12% है (चुनने पर ₹15,000 के 12% = ₹1,800 महीना तक सीमित)। इनकम टैक्स नए रिजीम से, ₹75,000 स्टैंडर्ड डिडक्शन और 4% सेस के साथ।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मेरी इन-हैंड सैलरी CTC से इतनी कम क्यों है?
CTC में कंपनी का PF और ग्रेच्युटी शामिल होते हैं, जो हर महीने नहीं मिलते, और आपका PF, प्रोफ़ेशनल टैक्स और इनकम टैक्स सैलरी से कटता है।
50% बेसिक क्यों?
नवंबर 2025 से लागू लेबर कोड के तहत बेसिक और DA मिलाकर आमतौर पर कुल वेतन का कम से कम 50% होना चाहिए। ज़्यादा बेसिक से PF और ग्रेच्युटी बढ़ती है, पर इन-हैंड थोड़ा कम होता है।
क्या यह पुराना टैक्स रिजीम इस्तेमाल करता है?
नहीं, यह नया रिजीम इस्तेमाल करता है, जो डिफ़ॉल्ट है। अपनी छूटों के साथ दोनों रिजीम की तुलना के लिए इनकम टैक्स कैलकुलेटर इस्तेमाल करें।